
संपादकीय
ब्लॉग के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी साहित्य का प्रकाशन एक प्रगतिशील कदम है और इसका स्वागत होना चाहिए। तमाम कुंठाओं से घिरी हिंदी पत्रिकाओं के संकुचित दायरों को तोड़कर ब्लॉग के माध्यम से अच्छे साहित्य की प्रस्तुति सचमुच एक सुखद अहसास कराती है और दूर-दराज बैठे साहित्य-प्रेमियों से नि:संकोच मिलने हेतु संवेदना का सेतु बनाने का अवसर प्रदान करती है। यही मेरी प्रेरणा का आधार है, जैसा कि मैंने अपनी पूर्व सूचना में प्रकट भी किया है। साहित्य की उत्कृष्टता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भाई सुभाष नीरव का सहयोग मिला जिसके लिए मैं उनका आभारी हूँ। हर सशक्त रचनाकार से रचनाएं भेजने हेतु मेरा आग्रह है। साथ ही, साहित्य प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों सभी के सहयोग की अपेक्षा करता हूँ। “सार्थक सृजन” का यह पहला अंक आपको सौंपते हुए मैं उम्मीद करता हूँ कि आप इस पर अपनी बेबाक प्रतिक्रिया से मुझे अवश्य अवगत कराएंगे।
संपादक- “सार्थक सृजन”
21 जून 2009
ब्लॉग के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी साहित्य का प्रकाशन एक प्रगतिशील कदम है और इसका स्वागत होना चाहिए। तमाम कुंठाओं से घिरी हिंदी पत्रिकाओं के संकुचित दायरों को तोड़कर ब्लॉग के माध्यम से अच्छे साहित्य की प्रस्तुति सचमुच एक सुखद अहसास कराती है और दूर-दराज बैठे साहित्य-प्रेमियों से नि:संकोच मिलने हेतु संवेदना का सेतु बनाने का अवसर प्रदान करती है। यही मेरी प्रेरणा का आधार है, जैसा कि मैंने अपनी पूर्व सूचना में प्रकट भी किया है। साहित्य की उत्कृष्टता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भाई सुभाष नीरव का सहयोग मिला जिसके लिए मैं उनका आभारी हूँ। हर सशक्त रचनाकार से रचनाएं भेजने हेतु मेरा आग्रह है। साथ ही, साहित्य प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों सभी के सहयोग की अपेक्षा करता हूँ। “सार्थक सृजन” का यह पहला अंक आपको सौंपते हुए मैं उम्मीद करता हूँ कि आप इस पर अपनी बेबाक प्रतिक्रिया से मुझे अवश्य अवगत कराएंगे।
संपादक- “सार्थक सृजन”
21 जून 2009

18 टिप्पणियां:
प्रिय यादव जी,
घर आते ही नया अंक पूरा पढ गया हूं.अलका ने विष्णु जी से हुए संवाद की मार्मिक प्रस्तुति की है.हाँ उन्हें बता दें कि अंतिम भाग मसीहे नहीं मसीहा लिखना चाहिये था.
नीरव भाई तो गजब की लघु कथा लिखते हैं.क्या टिप्पणी करूं! रंजना की कविताएँ भी अच्छी हैं.
आपको और लेखकों को बधाई!
राजेन्द्र गॉतम्
rajendra gautam
b-226, rajnagar palam, new delhi-110077
ph. +91+11+25362321 mob: +91+9868140469
“सार्थक सृजन” का पहला ही अंक बहुत जानदार बन गया है। हिंदी के महान साहित्यकार विष्णु जी पर अलका का आँखें भिगो देने वाला मार्मिक आलेख, सुभाष नीरव जी की उतनी ही मार्मिक और दिल को छू लेने वाली लघुकथाएं, और रंजना श्रीवास्तव जी की गहरी संवेदना लिए इतनी सशक्त कविताएं एक ही अंक में पढ़कर सार्थक लेखन से परिचय हुआ। आशा है, “सार्थक सृजन” अपने आगामी अंकों में भी ऐसी ही सार्थक और पठनीय रचनाएं देता रहेगा, मेरी शुभकामनाएं !
देविंदर कौर
पटियाला (पंजाब)
बंधुवर,
बढ़िया प्रयास है। शुभकामनाएं।
जय हिंद!
हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
आपका
उमेश यादव
umeshky2236@yahoo.co.in
Suresh jee
Namaskaar
Aapke blog ka bhraman karte samaya aisa laga jaise ek gulshan se guzar rahaa hoon. Badhai, bahut bahut badhai.
Aapkaa
R.P.'ghayal'
rpghayal@rbi.org.in
AAPKAA PRAYAAS SAARTHAK HAI.CHARCHIT
SAHITYAKAR ALKA SINHA,SUBHASH
NEERAV AUR RACHNA SHRIVASTAV TEENO
KEE STARIY RACHNAAON KO PADHNE KAA
SUAVSAR MILAA.AAPKO AUR RACHNAKARON KO BADHAAEE.
प्रिय भाई सुरेश,
विष्णु जी पर अलका सिन्हा जी का आलेख अच्छा है.
बधाई,
चन्देल
roopchandel@gmail.com
sarthak srijan ka pahla ank achha laga. is sarthak prayas ke liye badhai !
-ramesh kumar singh
rameshkumarsingh1972@yahoo.com
Bahut achchha hai. Badhaee.
-Hare prakash upadhyay.
mobile-09910222564
hpupadhyay@gmail.com
Suresh Bhai,
Apke blog par apne purane mitron ki rachnayen padh kar bahut achha laga. Aur achha laga ki apne pahle hi ank main aapne itni saksham rachnayen de hain. Ummeed kart ahoon ki aage bhi aap saksham aur mahetvapooran lekhkon ko parkashit karke pathkon ko pathniya samagri pradaan karenge. Aap ko is sarahniya prayaas ke liye aapko badhai deta hoon. Ramesh Kapur, Rohini 9891252314
Prabhakarji ke bare men Alkaji ka lekh va Neerav ki kathae achchhi hain.
-Bhagirath
bhagirath_gyansindhu@yahoo.com
visit my blog http://gyansindhu.blogspot.com
Dear Sureshji
Namaskar.Sarthak Srijan ke prakashan par bahut bahut badhai.Vishnu Prabhakarji se meri bhi yaaden judi hai jo meri pustak AMERICA HADDIYAON MAIN JAM JATA HAI par unke dwara patr se shuru huin thi.
Main aajkal apne betiyon keki education ke liye lambe samay ke liye bharat main hun.Do saal ke baad Newyork vacation par gai thi ti mitron ne bahut payaar diya.ek program bhi viseshroop se aayojit kiya gaya tha jis ki ek report ka link aap ko bhej rahi hun agar ho sake to aap ke is yagya main kaam aa ske.Is ank ki saari samagri dilcasp hai.Main bhi is main racnatmak yogdaan doongi.
Shubhakamnayon ke saath,
Dr.Anjana Sandhir
anjana_sandhir@yahoo.com
BHAI SURESH,
IS SAARTHAK ABHIYAAN KE LIYE BAHUT-BHAHUT BDHAI !
rajkamal
9811616298
rajkamal_7a@yahoo.co.in
सुरेश जी , नमस्कार। आज मैंने आपकी ब्लाग पत्रिका पढ़ी। टिप्पणियाँ भी छोड़ी हैं। प्रथम प्रस्तुति तो बहुत
ही अच्छी है। बधाई!
इला प्रसाद
ila_prasad1@yahoo.com
सुरेश जी,
सार्थक सृजन का पहला अंक पढ़ा । बहुत अच्छा लगा। आगामी अंकों की प्रतीक्षा रहेगी ।
शुभकामनाओं सहित,
शशि पाधा
Sarthak Srijan ka pratham ank vaakaee behtarin hai----vishnu prabhakar ke sakshatkar se leker subhash ji ki laghukathaon tak---ati samvedansheel,ati marmsparshi.
Meri kavitaaon ke prakashan hetu aapko bahut-2 aabhar.Aapka prayas sachmuch sarahneeya hai.
Ranjana Srivastava, siliguri,
west bengal
Sundar prayas..badhai.
भाई
यह वाकई सार्थक प्रयास है
शुभकामनायें
अशोक
09425787930
Behad Sarahniy prayasa.
Sadhuvad !!
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