गुरुवार, 26 नवंबर 2009

सार्थक सृजन (अक्तूबर- नवम्बर 2009)



सम्पादकीय
इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य की दस्तक समकालीन साहित्य का प्रतिनिधित्व भले ही पूरी तरह न कर पा रही हो, परन्तु यह दस्तक बहुत महत्वपूर्ण है। जो लोग इसे गम्भीरता से नहीं ले रहे हैं, वे दकियानूसी खयालों से ग्रसित हैं अथवा आधुनिक तकनीक से अनभिज्ञ हैं। इंटरनेट पर आजादी जितनी अधिक है, उतनी ही आत्मसंयमता भी महसूस की जा रही है। इस दायित्व का निर्वाह करने का प्रयास ‘सार्थक सृजन’ निरन्तर करेगा और उसका यह आग्रह भी होगा कि इस कर्म में जुड़े सहकर्मी भी इस दायित्व का निर्वाह गम्भीरता से करें।
‘सार्थक सृजन’ का यह चौथा अंक विलम्ब के साथ सौंप रहा हूँ। इस विलम्ब के लिए सफाई देना ठीक नहीं। सुधी पाठकों और सृजक मित्रों ने ‘सार्थक सृजन’ को निरन्तर पढ़ा और अपनी बेबाक टिप्पणी भेजी। मैं उन सभी का हृदय से आभारी हूँ। अपनी रचनाओं के प्रकाशन के लिए स्वीकृति देने वाले और अपनी बहुमूल्य रचनाएं भेजने वाले सभी रचनाकारों का मैं विशेषरूप से आभारी हूँ।
इस अंक में वरिष्ठ हिन्दी ग़जलकार उपेन्द्र कुमार की पाँच चुनिंदा ग़ज़लें और चर्चित लघुकथाकार अशोक भाटिया की चार सशक्त लघुकथाएं प्रस्तुत हैं। सुधी पाठकों से अनुरोध है कि वे ‘सार्थक सृजन’ और इन रचनाओं पर अपनी खुली राय देकर अनुग्रहीत करें।
सुरेश यादव
सम्पादक – ‘सार्थक सृजन’

7 टिप्‍पणियां:

रूपसिंह चन्देल ने कहा…

सार्थक सृजन की जितनी ही प्रशंसा की जाए कम है. अपने दायित्व के निर्वाह में ब्लॉग ब्लॉगर का ही प्रतिरूप होता है. इस मामले में आपकी सक्रियता श्लाघनीय है.

चन्देल

बेनामी ने कहा…

Shukriya. bahut achchha prayas hai.
Aapka.
Hare prakash
mobile-9910222564
hpupadhyay@gmail.com

सहज साहित्य ने कहा…

तीसरा चित्र और कपों की कहानी बेहतरीन लघुकथाएँ हैं ।
काम्बोज

सहज साहित्य ने कहा…

तीसरा चित और कपों की कहानी अच्छी लघुकथाएँ हैं ।काम्बोज

सुभाष नीरव ने कहा…

सुरेश जी, सार्थक सृजन में आप जो साहित्यिक रचनाएं दे रहे हैं, वे नि:संदेह सशक्त और प्रभावकारी होती हैं। आपका चयन दमदार है। रचनाओं का ऐसा ही स्तर बनाए रखें।

सुरेश यादव ने कहा…

भाई,रूप सिंह चंदेल,हरे प्रकाश उपाध्याय,कम्बोज जी एवं नीरव जी,आप की टिप्पड़ियां निरंतर उत्साह वर्धन करती हैं .आप की सक्रिय भागी दरी के लिए हृदय से आभारी हूँ.

Dayanand Arya ने कहा…

आपके नए अंक का इंतजार है ।